दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी आज चीन के तियानजिन में शंघाई सहयोग संगठन शिखर सम्मेलन के पूर्ण सत्र को संबोधित करेंगे। विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने तियानजिन में संवाददाताओं को बताया कि प्रधानमंत्री अपने संबोधन में संगठन के तहत क्षेत्रीय सहयोग बढ़ाने के बारे में भारत का दृष्टिकोण सामने रखेंगे। पूर्ण सत्र में संबोधन के बाद प्रधानमंत्री मोदी की रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ द्विपक्षीय बैठक होगी।

कल प्रधानमंत्री मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच बैठक हुई। बातचीत मुख्य रूप से दोनो देशो के संबंध मजबूत करने पर केन्द्रित रही। विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने बताया कि प्रधानमंत्री मोदी ने द्विपक्षीय संबंधों में मजबूती के लिए सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति और स्थिरता बहाल करने पर जोर दिया। विदेश सचिव ने कहा कि प्रधानमंत्री ने चीन के राष्ट्रपति के समक्ष यह स्पष्ट कर दिया कि सीमा पर शांति दोनों देशों के संबंधों के लिए आवश्यक है। विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने कहा कि वर्तमान व्यवस्थाओं के तहत सीमा पर शांति बनाये रखने और संबंधों में आने वाली अड़चने दूर करने पर दोनों नेताओं में सहमति थी।
विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने कहा कि पिछले कुछ महीनों में दोनों देशों ने संबंध नए सिरे से मजबूत करने के उपाय शुरू किए हैं। जून, 2020 में गलवान घाटी में भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच झड़प के बाद दोनों देशों के संबंधों में तनाव आ गया था। विदेश सचिव ने बताया कि प्रधानमंत्री मोदी ने सीमा पार से आतंकवाद की चुनौती का भी उल्लेख किया और इससे निपटने के लिए सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया। विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने बताया कि प्रधानमंत्री ने सीमा पार से आतंकवाद से निपटने का प्राथमिकता पर बल दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि इसका असर भारत और चीन दोनों देशों पर पड़ता है। दोनों नेताओं का मानना था कि आपसी मतभेद विवादों में नहीं बदलने चाहिए।
